Wednesday, November 13, 2019

SATTA KING | SATAA KING GAME | SATTA KING HISTORY

  WHAT IS SATTA KING सट्टा किंग क्या है।


सट्टा किंग शब्द का सम्बंध उस व्यक्ति् से होता है। जो सट्टे में लगायी हुई राशि ना हारे,अर्थात जिस व्यक्ति् को सट्टा गेम में कभी हराया ना जा सके उसे सट्टा किंग कहते है।

सट्टा गेम की शुरूआत कल्यान भगत जी ने सन् 1962 में मुंबई से कि थी।एक मटके में कुछ पर्चीयों को डाला जाता था। और उन पर्चीयों पर लोग पैसा लगाया करते थे फिर लगाई हुई पर्चीयों को अगले दिन खोला जाता था।

 जिस व्यक्ति् ने उस पर्ची पर पैसा लगाया है उसे ही सट्टा किंग कहा जाता था| मगर बदलते वक्त के साथ सट्टा किंग शब्द  का अर्थ भी बदल गया है और अलसी सट्टा किंग खाईवाल हो गया।

  चलिए जानते है कि सट्टा किंग कैसे काम करता है


 सट्टा किंग कुछ लोगो का एक समुह होता है। इनका उद्देश्य लोगों से अपने गेम पर सट्टा लगवाना होता है। ये काम काफी गोपनीय होता है। इनके पास अपना software होता है जिसमे रोजाना सट्टे का लेन देन दर्ज होता है।

खाईवाल सट्टे की राशि का कुछ हिस्सा अपने पास रखकर शेष राशि को आगे भेजता चलता है। और अंत में ये राशि सट्टा किंग वालो के पास पहुंचती है। ये लोग गेम को राशि के हिसाब से खोलते है जिस गेम पर सबसे कम राशि लगायी जाती है उसको अगले दिन खोल दिया जाता है

 नंबर खोलने से कुछ समय पहले कुछ सट्टा किंग बेवसाईट लीक नंबर भी दिखाती हैं।इनकी बेबसाईट पर कुछ एजेंट  भी होते है जो लगाईवाल से पैसे के बदले सट्टा नंबर देने का दाबा करते है। आज सट्टा किंग बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध हो गया है। और ये पूरे उत्तर भारत में अपनी पेंठ बना चुका है। 
समय समय पर विभिन्न राज्यों की पुलिस इन सटोरियों पर कार्यवाही करती रहती है। मगर एक कड़वा सच तो यह भी है कि ज्यादातर सट्टे का लेन देन स्थानीय पुलिस की ​निगरानी में ही होता है।

सट्टा किंग नाम आज के समय बहुत प्रचलित होता जा रहा है। आज  भी लोग गैरकानूनी तरीके से सट्टा लगाया करते है। इसके लिये कुछ SATTA KING ONLINE WEBSITE भी है जिस पर रोजाना सट्टे का नंबर खोला जाता है। दोस्तो ये सब कुछ पहले से ही फिक्स होता है |

कुछ WEBSITES ऐसी भी होती हैजो आपको रोजाना के लीक नंबर दिखाती है। और इनका लीक नंबर कुछ हद तक सटीक भी होता है क्योंकि  सट्टा किंग WEBSITE पर नंबर पहले से ही तय होते है। 
इनका अपना एक नेटवर्क होता है। जिसमें सट्टा किंग अर्थात कंपनी का ​मालिक और खाईवाल जो लोगो से सट्टे पर पैसा लगवाते है। उसके बीच सट्टे की राशि का बटवारा किया जाता है।