Friday, November 15, 2019

सट्टा क्या होता है। सट्टा मटका क्या है।

WHAT IS SATTA,सट्टा क्या हैं

दोस्तों सट्टा एक प्रकार का जुआ है। जो पूरे विश्व में खेला जाता है। सट्टा किसी पर भी लगाया जा सकता है। जैसे मैच,सट्टा नंबर, शेयर मार्केट, मनोरंजन, चुनाव हार जीत,व्यापार ,दिन तारीख,खेल,आदि
सट्टा 1900 दशक के शुरूआत से की काफी प्रचलन में रहा है। और ये आज भी बहुत बड़े पैमाने पर खेला जाता है। कुछ देशो ने तो इस पर पाबंदी लगा दी,और कुछ देशों में ये आज भी लीगल है।मगर बदलते बक्त के साथ सट्टे के खेलने का तरीका भी बदलता गया और ये काफी एडवांस भी होता चला गया।
आज सट्टा फिक्सिंग का रूप ले चुका है। जो की पूरे विश्व में गैरकानूनी है। सट्टेबाज हार या जीत को पहले से ही ​फिक्स कर लेते है।जिसके बदले में फिक्सिंग करने वाले को सट्टे की कुछ राशि ईनाम  के रूप में दी जाती है।

what is satta matka and it,s history मटका क्या है,और इसका इतिहास। 

 सट्टा मटका एक तरह का जुआ है।इसमें कुछ पर्चीयों पर कुछ नंबरों को लिखकर एक मटके में डाला जाता है। और अगले दिन उस मटके में से एक पर्ची को निकाला जाता है इस पर लगने वाली राशि को सट्टा कहा जाता है। और जिसमे से इन पर्चीयों को डाला और निकाला जाता है,उसे मटका कहते है|

सबसे पहले कल्यान भगत जी ने मटका गेम को  1962 में बर्ली मटका नाम से शुरू किया तब ये इतना चलन में नही था मगर धीरे धीरे ये लोकप्रिय होता चला गया। उस समय मटके की लोकप्रियता बहुत  बढ़ चुकी थी। 

बर्ष 1964 में रनत खतरी ने मटके के नियम में कुछ बदलाब करके न्यू वर्ली मटका नाम से इसको शुरू कर दिया। कल्यान जी भगत का मटका गेम प्रतिदिन खेला जाता था। जबकि रतन खतरी जी का मटका गेम हफ़्ते में सिर्फ 5 दिन सोमबार से शुक्रवार तक खेला जाता था। 

उस समय मटका गेम मघ्य मुबंई में बहुत ही लोकप्रिय हो चुका था। जिसकी बजह से सट्टा लगाने बालो की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी होती गयी।और जिसकी बजह से सटोरियों ने मघ्य मुंबई और उसके आसपास की जगह पर अपनी दुकाने खोल दी।

बर्ष 1980 और 1990 के बीच में सट्टा मटका अपने चरम पर पहुंच गया। ये अब एक व्यापार का रूप ले चुका था।उस जमाने मे एक आंकड़े के अनुसार सट्टे पर हर महीने लगभग 500 करोड़ से अधिक की राशि लगाई जाने लगी।
 सट्टा मटका पर मुंबई पुलिस की बड़ी कार्यवाही के कारण सटोरियों ने मुंबई से बहार गुजरात राजस्थान उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में अपना केंद्र बना लिया

।मुंबई में सट्टे पर पाबंदी की बजह से सटोरिये सट्टे के नये नये स्त्रोतों का पता लगाने लगें जैसे,match fixing online satta,एक आंकड़े के अनुसार बर्ष 1982 से 1990 के बीच शहर में कुल 5000 से ज्यादा सटोरियें थे,जो कि बर्ष 1990 से 2000 तक मात्र 2000 से भी कम रह गये।

2 comments: